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सम्पूर्ण धर्म मार्गदर्शन

मंत्र · चालीसा · पूजा विधि · व्रत · देवी-देवता · राशि-नाम मार्गदर्शन

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मंत्र संग्रह
Sacred Mantras Collection
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सर्वश्रेष्ठ मंत्र
ॐ (प्रणव मंत्र)
मंत्र
अर्थ — ॐ ब्रह्माण्ड की आदि ध्वनि हैं। यह परमात्मा का नाम हैं। इसका जाप सभी मंत्रों से पहले करना चाहिए। यह त्रिदेव — ब्रह्मा, विष्णु, महेश का संयुक्त रूप हैं।
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भगवान शिव
शिव मंत्र संग्रह
महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् । उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॥
अर्थ — हम तीन नेत्रों वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगन्धित और सबका पोषण करने वाले हैं। जिस प्रकार ककड़ी अपने बंधन से मुक्त हो जाती हैं, उसी प्रकार हम भी मृत्यु से मुक्त हो जाएं और अमृत को प्राप्त करें।
पंचाक्षर मंत्र (सबसे सरल)
ॐ नमः शिवाय
अर्थ — भगवान शिव को नमस्कार। न — पृथ्वी, म — जल, शि — अग्नि, वा — वायु, य — आकाश। पाँच तत्वों का प्रतीक।
शिव गायत्री मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि । तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् ॥
रुद्राष्टकम् (पहला श्लोक)
नमामीशमीशान निर्वाणरूपं विभुं व्यापकं ब्रह्मवेदस्वरूपम् । निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहम् ॥
शिव धुन
हर हर महादेव · शंभो शंकर · ओम नमः शिवाय · जय भोले नाथ
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भगवान विष्णु
विष्णु मंत्र संग्रह
विष्णु द्वादशाक्षर मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
अर्थ — भगवान वासुदेव (श्रीकृष्ण/विष्णु) को नमस्कार। यह 12 अक्षरों का मंत्र मोक्ष देने वाला माना जाता हैं।
विष्णु गायत्री
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥
श्री राम मंत्र
ॐ श्री रामाय नमः श्री राम जय राम जय जय राम राम नाम सत्य हैं · हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
श्री कृष्ण मंत्र
ॐ श्री कृष्णाय नमः हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे । हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे ॥
महामंत्र — यह 16 नामों का महामंत्र हैं। इसे कलियुग का सबसे प्रभावशाली मंत्र माना जाता हैं।
नारायण मंत्र
ॐ नमो नारायणाय ॐ विष्णवे नमः
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माँ दुर्गा / शक्ति
दुर्गा मंत्र संग्रह
दुर्गा मूल मंत्र
ॐ दुं दुर्गायै नमः
अर्थ — माँ दुर्गा को प्रणाम। सभी कठिनाइयों को दूर करने वाली देवी को नमस्कार।
दुर्गा गायत्री
ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्यकुमारी धीमहि । तन्नो दुर्गिः प्रचोदयात् ॥
महाकाली मंत्र
ॐ क्रीं काल्यै नमः
लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद । ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः ॥ ॐ महालक्ष्म्यै नमः
अर्थ — माँ लक्ष्मी को प्रणाम। धन, समृद्धि और सौभाग्य की देवी की उपासना।
सरस्वती मंत्र
ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वागदेव्यै नमः
अर्थ — विद्या, बुद्धि और कला की देवी माँ सरस्वती को नमस्कार। विद्यार्थियों के लिए विशेष लाभकारी।
नवदुर्गा नाम मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ शैलपुत्री · ब्रह्मचारिणी · चन्द्रघंटा · कूष्माण्डा स्कन्दमाता · कात्यायनी · कालरात्रि · महागौरी · सिद्धिदात्री
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भगवान हनुमान
हनुमान मंत्र संग्रह
हनुमान मूल मंत्र
ॐ हं हनुमते नमः
अर्थ — शक्ति और साहस के देवता हनुमान जी को नमस्कार।
हनुमान बीज मंत्र
ॐ ऐं भ्रीं हनुमते रामदूताय लंकाविध्वंसनाय अंजनीसुताय वायुपुत्राय महाबलाय श्रीरामभक्ताय नमः ॥
संकट मोचन मंत्र
मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम् । वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शिरणं प्रपद्ये ॥
हनुमान अष्टक (प्रथम पद)
बाल समय रवि भक्षि लियो तब तीनहुँ लोक भयो अन्धियारो । ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो ॥
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प्रथम पूज्य
गणेश मंत्र संग्रह
गणेश मूल मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः
अर्थ — विघ्नहर्ता गणेश जी को प्रणाम। कोई भी शुभ कार्य से पहले यह मंत्र जपें।
गणेश गायत्री
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
गणेश स्तुति
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ । निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा ॥
अर्थ — टेढ़ी सूंड वाले और करोड़ों सूर्यों की कांति वाले महाकाय गणेश जी, मेरे सभी कार्यों में सदा निर्विघ्नता प्रदान करें।
शुभ लाभ मंत्र
ॐ श्री गणेशाय नमः ॐ नमो सिद्धि विनायकाय सर्व कार्य कर्त्रे सर्व विघ्न प्रशमनाय नमः
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सूर्य देव
सूर्य मंत्र संग्रह
गायत्री महामंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं । भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात् ॥
अर्थ — हे भू, भुव और स्वः लोक के प्राण देने वाले! हम उस दिव्य सूर्य देव की वरेण्य तेज का ध्यान करते हैं। वे हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
सूर्य मूल मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः ॐ सूर्याय नमः · ॐ आदित्याय नमः
सूर्योदय अर्घ्य मंत्र
एही सूर्य सहस्रांशो तेजोराशे जगत्पते । अनुकम्पया मां भक्त्या गृहाणार्घ्यं दिवाकर ॥
विशेष उद्देश्य
सिद्ध मंत्र — विशेष कार्यों के लिए
शान्ति पाठ
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
स्वस्ति मंत्र (आशीर्वाद)
स्वस्ति प्रजाभ्यः परिपालयन्तां न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः । गोब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं लोकाः समस्ताः सुखिनो भवन्तु ॥
विद्या प्राप्ति मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौः जगत्प्रसूत्यै नमः सरस्वत्यै नमः — विद्यां देहि नमो नमः
धन प्राप्ति मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवनमहालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्यं नाशय प्रचुर धनं देहि दापय स्वाहा ॥
स्वास्थ्य रक्षा मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे... (महामृत्युंजय मंत्र 108 बार) ॐ नमो भगवते धन्वन्तरये अमृतकलश हस्ताय नमः (धन्वन्तरि मंत्र)
भय नाश मंत्र
ॐ ह्रीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा ॥
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चालीसा संग्रह
Sacred Forty Verses
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सर्वाधिक पाठ
हनुमान चालीसा
॥ दोहा ॥ श्री गुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि । बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि ॥ बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवन कुमार । बल बुधि बिद्या देहु मोहि हरहु कलेस बिकार ॥
॥ चौपाई ॥ जय हनुमान ज्ञान गुन सागर । जय कपीस तिहुँ लोक उजागर ॥ राम दूत अतुलित बल धामा । अंजनि पुत्र पवनसुत नामा ॥ महावीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥ कंचन बरन बिराज सुबेसा । कानन कुंडल कुंचित केसा ॥ हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजे । काँधे मूँज जनेऊ साजे ॥ शंकर सुवन केसरी नंदन । तेज प्रताप महा जग बंदन ॥ विद्यावान गुनी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ॥ सूक्ष्म रूप धरि सियहिँ दिखावा । बिकट रूप धरि लंक जरावा ॥ भीम रूप धरि असुर संहारे । रामचंद्र के काज सँवारे ॥ लाय सजीवन लखन जियाये । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥ रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई । तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥ सहस बदन तुम्हारो जस गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥ सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा । नारद सारद सहित अहीसा ॥ जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते । कबि कोबिद कहि सकें कहाँ ते ॥ तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राजपद दीन्हा ॥ तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना । लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥ जुग सहस्र जोजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥ प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥ दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥ राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥ सब सुख लहैं तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डरना ॥ आपन तेज सम्हारो आपे । तीनों लोक हाँक ते काँपे ॥ भूत पिशाच निकट नहिं आवे । महावीर जब नाम सुनावे ॥ नासे रोग हरे सब पीरा । जपत निरंतर हनुमत बीरा ॥ संकट से हनुमान छुड़ावे । मन क्रम बचन ध्यान जो लावे ॥ सब पर राम तपस्वी राजा । तिनके काज सकल तुम साजा ॥ और मनोरथ जो कोई लावे । सोइ अमित जीवन फल पावे ॥ चारों जुग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥ साधु संत के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥ अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥ राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥ तुम्हरे भजन राम को पावे । जनम जनम के दुख बिसरावे ॥ अंत काल रघुबर पुर जाई । जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई ॥ और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेई सर्व सुख करई ॥ संकट कटे मिटे सब पीरा । जो सुमिरे हनुमत बलबीरा ॥ जय जय जय हनुमान गोसाईं । कृपा करहु गुरु देव की नाईं ॥ जो सत बार पाठ कर कोई । छूटहिं बंदि महा सुख होई ॥ जो यह पढ़े हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥ तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजे नाथ हृदय मह डेरा ॥
॥ दोहा ॥ पवन तनय संकट हरन मंगल मूरति रूप । राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप ॥
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माँ दुर्गा
दुर्गा चालीसा
॥ दोहा ॥ नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो अम्बे दुख हरनी ॥ निरंकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥
शश्वत ज्योति जगत को दीनी । सकल भुवन को चमक दीनी । सिंह सवारी तुम्हारी माया । जग को काटे भव की छाया । जय माता काली जय दुर्गा माई । तुम्हारी कृपा से दुख मिट जाई । प्रेम पूर्वक जो जन ध्यावे । सो नर निश्चय मनवांछित फल पावे । माँ का ध्यान करें जो भाई । दु:ख जाये हो जाए भलाई । माँ की कृपा बरसे अपार । जीवन बने सुखमय संसार । नव दुर्गा का करो गुणगान । मिलें भक्त को मोक्ष निर्वाण । तेरी शक्ति है अति महान । जय दुर्गा माँ जय भगवान ।
॥ दोहा ॥ दुर्गा चालीसा जो नर गावे । सब सुख भोग परम पद पावे ॥ देवीदास शरण नित रहई । माँ दुर्गा की कृपा मिलत रहई ॥
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भोलेनाथ
शिव चालीसा
॥ दोहा ॥ जय गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान । कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान ॥
जय गिरिजापति दीन दयाला । सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥ भाल चंद्रमा सोहत नीके । कानन कुण्डल नागफनी के ॥ अंग गौर शिर गंग बहाये । मुण्डमाल तन क्षार लगाये ॥ वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे । छवि को देख नाग मुनि मोहे ॥ मैना मातु की हवे दुलारी । बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥ कर त्रिशूल सोहत छवि भारी । करत सदा शत्रुन छयकारी ॥ नंदि गणेश सोहे तहं कैसे । सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥ कार्तिक श्याम और गणराऊ । या छवि को कहि जात न काऊ ॥ देवन जबही जाय पुकारा । तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥ किया उपद्रव तारक भारी । देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥ तुरत षडानन आप पठायउ । लवनिमेष महं मारि गिरायउ ॥ आप जलंधर असुर संहारा । सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥
॥ दोहा ॥ भक्त अखिलेश्वर दास बारम्बार करे शिव नाम । जीवन मुक्ति पद पाईये जपहु महादेव नाम ॥
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विघ्नहर्ता
गणेश चालीसा
॥ दोहा ॥ जय गणपति सदगुणसदन, कविवर बदन कृपाल । विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल ॥
जय जय जय गणपति गणराजू । मंगल भरण करण शुभ काजू ॥ जय गजबदन सदन सुखदाता । विश्व विनायक बुद्धि विधाता ॥ वक्र तुण्ड शुचि शुण्ड सुहावे । तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावे ॥ राजत मणि मुक्तन उर माला । स्वर्ण सुवर्ण देह छवि न्याला ॥ एकदन्त दयावंत चतुर्भज धारी । भाल सिंदूर सोहे छवि प्यारी । बड़े बदन तजे भारी । अनंत गुणों से लम्बे सदा चमत्कारी । सहस नाम अगणित गावैं । भक्त अष्ट सिद्धि नव निधि पावैं । गणपति इष्ट मित्र सबका । दूर हो विघ्न अब सबका ।
॥ दोहा ॥ गणपति चालीसा जो पढ़े हर रोज । पूरे होते सभी काज छवि अमोज ॥
🪷
धन की देवी
लक्ष्मी चालीसा
॥ दोहा ॥ माता लक्ष्मी करी कृपा, करो हृदय में वास । मनोकामना सिद्ध कर, पूर्ण करो अरदास ॥
सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही । ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोही ॥ तुम समान नहिं कोई उपकारी । सब विधि पूर्ण करहु मम आरी ॥ जिन्ह तुम्हारो ध्यान धरा जग माहीं । रिद्धि सिद्धि धन उनको चाहीं । जय जय जय लक्ष्मी भवानी । महिमा तुम्हारी वेद न जानी । सागर सुता विष्णु प्रिया माता । जग में तुमसे ही सुख सम्पदा जाता । जो नर तुमको शुद्ध मन भजते । भव सागर से वे नर तरते ।
॥ दोहा ॥ लक्ष्मी चालीसा पाठ से, होत सिद्धि सब काज । महालक्ष्मी कृपा से मिले, धन यश और समाज ॥
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पूजा विधि
Worship Methods
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सामान्य नियम
प्रतिदिन पूजा की सामान्य विधि
  • प्रातःकाल उठकर स्नान करें और शुद्ध वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थान की सफाई करें — फूल, धूप, दीप तैयार करें।
  • सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करें।
  • आचमन — जल से हाथ धोएं और तीन बार जल पीएं।
  • दीप प्रज्ज्वलित करें — दीपक के सामने हाथ जोड़ें।
  • धूप-अगरबत्ती जलाएं और देवता के सामने घुमाएं।
  • फूल अर्पित करें — तुलसी, बिल्वपत्र या मौसमी फूल।
  • नैवेद्य (भोग) अर्पित करें — फल, मिठाई या घर का भोजन।
  • मंत्र जाप या भजन करें — कम से कम 108 बार।
  • आरती करें — शंख और घंटी बजाएं।
  • प्रसाद ग्रहण करें और परिवार में वितरित करें।
  • क्षमा प्रार्थना करें — पूजा में हुई किसी भूल के लिए।
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सोमवार विशेष
शिव पूजा विधि
  • प्रातः उठकर — ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करें।
  • शिवलिंग अभिषेक — जल, दूध, दही, घी, शहद और गन्ने के रस से।
  • अर्पण — बिल्वपत्र (3 पत्तों वाला), धतूरा, भांग, सफेद फूल।
  • भस्म — माथे पर त्रिपुण्ड (तीन रेखाएं) लगाएं।
  • मंत्र — ॐ नमः शिवाय 108 बार जपें।
  • महामृत्युंजय मंत्र — 11 या 108 बार।
  • रुद्राभिषेक — सोमवार को रुद्राभिषेक करना सर्वोत्तम।
  • शिव आरती — "ॐ जय शिव ओंकारा" गाएं।
  • व्रत — सोमवार को उपवास रखें, एकल भोजन करें।
  • प्रसाद — भांग की पंजीरी, पंचामृत।
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नवरात्रि विशेष
दुर्गा पूजा विधि
  • घट स्थापना — नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापित करें।
  • अखण्ड ज्योति — नौ दिन अखण्ड दीप जलाएं।
  • नव दुर्गा क्रम — प्रतिदिन एक देवी का विशेष पूजन।
  • चुनरी — माँ को लाल या नारंगी चुनरी अर्पित करें।
  • दुर्गा सप्तशती — प्रतिदिन एक अध्याय का पाठ करें।
  • अर्पण — लाल फूल (गुलाब, कनेर), लाल चुनरी, श्रृंगार।
  • भोग — खीर, पूड़ी, काले चने, हलवा।
  • कन्या पूजन — अष्टमी या नवमी को 9 कन्याओं को भोजन कराएं।
  • हवन — अष्टमी को हवन करें।
  • दुर्गा आरती — "जय अम्बे गौरी" गाएं।
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वैष्णव पूजा
विष्णु / कृष्ण / राम पूजा विधि
  • एकादशी व्रत — माह में दो बार — विष्णु प्रसन्न होते हैं।
  • तुलसी पूजा — प्रतिदिन तुलसी को जल दें और परिक्रमा करें।
  • पंचामृत अभिषेक — दूध, दही, घी, शहद, शक्कर से।
  • अर्पण — तुलसी दल, पीले फूल, मखाना, पंजीरी।
  • मंत्र — ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 108 बार।
  • भगवान कृष्ण — माखन-मिश्री भोग लगाएं।
  • राम पूजा — रामायण या रामचरितमानस का पाठ।
  • विष्णु आरती — "ॐ जय जगदीश हरे" गाएं।
  • शुभ रंग — पीला, नारंगी।
  • गुरुवार व्रत — विष्णु को समर्पित।
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शुभारम्भ में
गणेश पूजा विधि
  • स्थापना — मिट्टी, धातु या पत्थर की गणेश मूर्ति।
  • अर्पण — दूर्वा (हरी घास), लाल फूल, मोदक, लड्डू।
  • सिंदूर — माथे पर लगाएं।
  • 21 दूर्वा — गणेश जी को 21 दूर्वा की गट्ठर चढ़ाएं।
  • मंत्र — ॐ गं गणपतये नमः।
  • गणेश चतुर्थी — भाद्र शुक्ल चतुर्थी को विशेष पूजन।
  • भोग — मोदक, लड्डू, केला।
  • आरती — "जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।"
  • विसर्जन — पूजा के बाद जल में प्रतिमा विसर्जित करें।
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मंगलवार-शनिवार
हनुमान पूजा विधि
  • स्नान — प्रातः काल स्नान करके लाल वस्त्र पहनें।
  • सिंदूर — हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं।
  • तेल — चमेली का तेल अर्पित करें।
  • अर्पण — लाल फूल, गेंदा, बेसन के लड्डू, गुड़-चना।
  • हनुमान चालीसा — सबसे पहले पाठ करें।
  • बजरंग बाण — संकट में बजरंग बाण का पाठ।
  • मंत्र — ॐ हं हनुमते नमः 108 बार।
  • राम नाम — "राम" नाम का जाप हनुमान जी को प्रिय।
  • आरती — "आरती कीजे हनुमान लला की।"
  • व्रत — मंगलवार और शनिवार का व्रत रखें।
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दिन और देवता
Day — Deity — Worship Guide
सोमवार · Monday
🔱 भगवान शिव
रंग — सफेद / हल्का नीला। व्रत करें। शिवलिंग पर जल, दूध और बिल्वपत्र चढ़ाएं। ॐ नमः शिवाय जपें।
मंगलवार · Tuesday
🐒 हनुमान जी / माँ दुर्गा
रंग — लाल। हनुमान चालीसा पढ़ें। सिंदूर, लाल फूल चढ़ाएं। बेसन के लड्डू का भोग। व्रत रखें।
बुधवार · Wednesday
🐘 गणेश जी / विट्ठल
रंग — हरा। गणेश जी को दूर्वा और मोदक चढ़ाएं। बुध ग्रह शांति के लिए हरा वस्त्र।
गुरुवार · Thursday
🌸 विष्णु जी / बृहस्पति देव
रंग — पीला। केले का भोग। तुलसी अर्पित करें। पीले वस्त्र पहनें। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय जपें।
शुक्रवार · Friday
🪷 माँ लक्ष्मी / संतोषी माँ
रंग — सफेद / गुलाबी। कमल के फूल चढ़ाएं। खीर का भोग। श्री महालक्ष्मी अष्टकम् पढ़ें।
शनिवार · Saturday
⚫ शनिदेव / हनुमान जी
रंग — काला / नीला। तिल का तेल दान करें। शनि मंदिर जाएं। हनुमान चालीसा पढ़ें।
रविवार · Sunday
☀️ सूर्य देव
रंग — नारंगी / लाल। सूर्योदय पर जल अर्घ्य दें। गायत्री मंत्र जपें। गेहूं का दान करें।
🌟
नाम — राशि — देवता
Name Letter — Zodiac — Deity Guide
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नाम के अक्षर से
अपनी राशि और देवता पहचानें
च, चि, चे, चो · ल, ली
♈ मेष राशि
देवता: भगवान गणेश
ई, उ, ए, ओ, व, वा
♉ वृष राशि
देवता: लक्ष्मी माँ
का, की, कु, के, को · घ
♊ मिथुन राशि
देवता: विष्णु जी
डा, डि, डे · हि, हे, हो · दा
♋ कर्क राशि
देवता: शिव जी
मा, मि, मे, मो · टा, टि, टे
♌ सिंह राशि
देवता: सूर्य देव
पो, पा, पि, पे · ढो, ण · ठ, पे
♍ कन्या राशि
देवता: दुर्गा माँ
रा, री, रे, रो · ता, ति, ते, तो
♎ तुला राशि
देवता: माँ लक्ष्मी
ना, नि, ने, नो · या, यि, ये
♏ वृश्चिक राशि
देवता: काली माँ
ये, यो · भा, भि, भे, भो · धा, फ
♐ धनु राशि
देवता: दत्तात्रेय
खा, खि, खे · जा, जि · खो, गा
♑ मकर राशि
देवता: शनि देव
गो, सा, सि, से, सो · दा, दि
♒ कुंभ राशि
देवता: हनुमान जी
दे, दो, चा, चि · झ, ञ · थ, थि
♓ मीन राशि
देवता: विष्णु जी
📅
जन्म तिथि से
जन्म दिनांक अनुसार इष्ट देवता
1, 10, 19, 28 को जन्मे
☀️ मूलांक 1 — सूर्य
इष्ट देवता: सूर्य देव। गायत्री मंत्र जपें। रविवार का व्रत लाभकारी।
2, 11, 20, 29 को जन्मे
🌙 मूलांक 2 — चंद्र
इष्ट देवता: शिव जी। सोमवार व्रत। ॐ नमः शिवाय जपें।
3, 12, 21, 30 को जन्मे
🌸 मूलांक 3 — बृहस्पति
इष्ट देवता: विष्णु जी। गुरुवार व्रत। विष्णु सहस्रनाम पढ़ें।
4, 13, 22, 31 को जन्मे
⚡ मूलांक 4 — राहु
इष्ट देवता: दुर्गा माँ। दुर्गा सप्तशती का पाठ। शनिवार दान।
5, 14, 23 को जन्मे
💚 मूलांक 5 — बुध
इष्ट देवता: गणेश जी। बुधवार व्रत। गणेश चालीसा पढ़ें।
6, 15, 24 को जन्मे
🪷 मूलांक 6 — शुक्र
इष्ट देवता: लक्ष्मी माँ। शुक्रवार व्रत। कमल पुष्प चढ़ाएं।
7, 16, 25 को जन्मे
🌊 मूलांक 7 — केतु
इष्ट देवता: भगवान विष्णु। एकादशी व्रत। तुलसी पूजन।
8, 17, 26 को जन्मे
⚫ मूलांक 8 — शनि
इष्ट देवता: शनि देव / हनुमान। शनिवार हनुमान चालीसा। तिल दान।
9, 18, 27 को जन्मे
🔴 मूलांक 9 — मंगल
इष्ट देवता: हनुमान जी। मंगलवार व्रत। बजरंग बाण पाठ।
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व्रत और त्योहार
Vrat — Festivals — Celebrations
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साप्ताहिक व्रत
सप्ताह के प्रमुख व्रत
  • सोमवार व्रत — शिव जी के लिए। मनवांछित फल देने वाला, विवाह और संतान सुख।
  • मंगलवार व्रत — हनुमान जी और दुर्गा माँ के लिए। शत्रु नाश, शक्ति प्राप्ति।
  • बुधवार व्रत — गणेश जी और बुध देव। व्यापार में लाभ, बुद्धि वृद्धि।
  • गुरुवार व्रत — विष्णु जी, बृहस्पति देव। धन-संपदा, गुरु कृपा।
  • शुक्रवार व्रत — संतोषी माँ, लक्ष्मी माँ। सुख-समृद्धि, सौभाग्य।
  • शनिवार व्रत — शनि देव, हनुमान जी। साढ़ेसाती शांति, कष्ट मुक्ति।
  • रविवार व्रत — सूर्य देव। स्वास्थ्य, यश, सफलता।
🌕
मासिक तिथि
महत्वपूर्ण तिथियाँ
  • एकादशी (माह में दो बार) — विष्णु व्रत, निर्जला या फलाहार।
  • चतुर्थी — गणेश चतुर्थी, गणेश जी की पूजा।
  • प्रदोष व्रत (त्रयोदशी) — शिव जी की विशेष पूजा।
  • पूर्णिमा — सत्यनारायण कथा, पितृ तर्पण।
  • अमावस्या — पितृ पूजन, दान-तर्पण।
  • शिवरात्रि — महाशिवरात्रि — फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी।
  • नवमी — राम नवमी — चैत्र शुक्ल नवमी।
  • अष्टमी — दुर्गाष्टमी, जन्माष्टमी।
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वार्षिक पर्व
प्रमुख हिन्दू त्योहार
  • दीपावली — कार्तिक अमावस्या। लक्ष्मी-गणेश पूजन। घर में दीप जलाएं।
  • होली — फाल्गुन पूर्णिमा। होलिका दहन। रंगों का पर्व।
  • नवरात्रि — चैत्र और शारदीय। 9 दिन माँ दुर्गा की पूजा।
  • जन्माष्टमी — भाद्र कृष्ण अष्टमी। कृष्ण जन्म उत्सव।
  • महाशिवरात्रि — फाल्गुन कृष्ण 14। शिव विवाह महोत्सव।
  • गणेश चतुर्थी — भाद्र शुक्ल 4। गणेश स्थापना।
  • राम नवमी — चैत्र शुक्ल 9। भगवान राम का जन्मदिन।
  • हनुमान जयंती — चैत्र पूर्णिमा। हनुमान जन्मोत्सव।
  • मकर संक्रांति — जनवरी 14। तिल-गुड़ दान, स्नान।
  • रक्षाबंधन — श्रावण पूर्णिमा। राखी पर्व।
  • करवाचौथ — कार्तिक कृष्ण 4। सुहागिन महिलाओं का व्रत।
  • बसंत पंचमी — माघ शुक्ल 5। सरस्वती पूजन।
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धर्म ज्ञान
Hindu Dharma Knowledge
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पवित्र ग्रंथ
हिन्दू धर्म के प्रमुख ग्रंथ
  • वेद (4) — ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद। सनातन ज्ञान का मूल।
  • उपनिषद — 108 उपनिषद। आत्मा-परमात्मा का गूढ़ ज्ञान।
  • भगवद गीता — महाभारत का भाग। श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को उपदेश।
  • रामायण — वाल्मीकि रामायण और तुलसीदास कृत रामचरितमानस।
  • महाभारत — 18 पर्व। विश्व का सबसे बड़ा महाकाव्य।
  • पुराण (18) — ब्रह्म, विष्णु, शिव, देवी, भागवत आदि।
  • मनुस्मृति — धर्म के नियम और सामाजिक व्यवस्था।
  • योगसूत्र — पतंजलि के 196 सूत्र। योग का मूल ग्रंथ।
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जीवन दर्शन
हिन्दू धर्म के 4 आश्रम और 4 पुरुषार्थ
चार आश्रम
1. ब्रह्मचर्य — विद्या ग्रहण काल (जन्म से 25 वर्ष) 2. गृहस्थ — गृहस्थ जीवन (25 से 50 वर्ष) 3. वानप्रस्थ — धीरे-धीरे संसार छोड़ना (50 से 75) 4. सन्यास — पूर्ण त्याग और मोक्ष की खोज (75+)
चार पुरुषार्थ
1. धर्म — नैतिकता, कर्तव्य, धर्म का पालन 2. अर्थ — धन, समृद्धि, जीविका 3. काम — इच्छाओं की पूर्ति, प्रेम 4. मोक्ष — जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति
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त्रिदेव
ब्रह्मा · विष्णु · महेश
🌸 ब्रह्मा जी
सृष्टि के रचयिता
शक्ति — सरस्वती। वाहन — हंस। आयुध — कमंडल, वेद। 4 मुख, 4 भुजाएं।
🌸 विष्णु जी
सृष्टि के पालक
शक्ति — लक्ष्मी। वाहन — गरुड़। आयुध — शंख, चक्र, गदा, पद्म। नीला वर्ण।
🔱 शिव जी
सृष्टि के संहारक
शक्ति — पार्वती। वाहन — नंदी। आयुध — त्रिशूल, डमरू। जटाओं में गंगा।
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दश अवतार
विष्णु के 10 अवतार (दशावतार)
  • 1. मत्स्य — मछली रूप। जल प्रलय से वेदों और मनु की रक्षा।
  • 2. कूर्म — कछुआ रूप। समुद्र मंथन में मंदराचल पर्वत धारण।
  • 3. वराह — सूअर रूप। हिरण्याक्ष से पृथ्वी की रक्षा।
  • 4. नृसिंह — आधे मनुष्य, आधे सिंह। हिरण्यकशिपु वध।
  • 5. वामन — बौना ब्राह्मण। राजा बलि से तीन पग में भूमि।
  • 6. परशुराम — ब्राह्मण वीर। 21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय-विहीन।
  • 7. श्री राम — मर्यादा पुरुषोत्तम। रावण वध, धर्म स्थापना।
  • 8. श्री कृष्ण — लीलाधर। महाभारत, गीता उपदेश, कंस वध।
  • 9. बुद्ध — ज्ञान अवतार। अहिंसा और शांति का मार्ग।
  • 10. कल्कि — भविष्य अवतार। कलियुग के अंत में धर्म स्थापना।
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दैनिक जीवन
हिन्दू जीवन के नियम और संस्कार
  • 16 संस्कार — गर्भाधान से मृत्यु तक के सोलह धार्मिक संस्कार।
  • पंच महायज्ञ — ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, पितृयज्ञ, भूतयज्ञ, अतिथियज्ञ।
  • प्रातः नमस्कार — उठते समय धरती माँ को प्रणाम करें।
  • अतिथि देवो भव — घर आए अतिथि को देव मानकर सेवा करें।
  • गायत्री जाप — प्रतिदिन 108 बार गायत्री मंत्र का जाप।
  • संध्यावंदन — सूर्योदय और सूर्यास्त पर संध्या वंदना।
  • तुलसी पूजन — प्रतिदिन तुलसी को जल और परिक्रमा।
  • गोपूजन — गाय में 33 करोड़ देवताओं का वास मानकर सेवा।
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