॥ दोहा ॥
माता लक्ष्मी करी कृपा, करो हृदय में वास ।
मनोकामना सिद्ध कर, पूर्ण करो अरदास ॥
सिन्धु सुता मैं सुमिरौं तोही । ज्ञान बुद्धि विद्या दो मोही ॥
तुम समान नहिं कोई उपकारी । सब विधि पूर्ण करहु मम आरी ॥
जिन्ह तुम्हारो ध्यान धरा जग माहीं ।
रिद्धि सिद्धि धन उनको चाहीं ।
जय जय जय लक्ष्मी भवानी ।
महिमा तुम्हारी वेद न जानी ।
सागर सुता विष्णु प्रिया माता ।
जग में तुमसे ही सुख सम्पदा जाता ।
जो नर तुमको शुद्ध मन भजते ।
भव सागर से वे नर तरते ।
॥ दोहा ॥
लक्ष्मी चालीसा पाठ से, होत सिद्धि सब काज ।
महालक्ष्मी कृपा से मिले, धन यश और समाज ॥