यदि आज श्री राजीव दीक्षित जिंदा होते तो अब तक शायद भारत में स्वदेशी और आयुर्वेद के सबसे बड़े ब्रांड बन चुके होते। पिछले ५०० सालों में राजीव दीक्षित जैसा कोई आदमी भारत में पैदा ही नहीं हुआ — यह कहना अतिशयोक्ति नहीं, सत्य है।
यदि आप किसी को रोटी खिलाते हैं तो उसका सिर्फ एक दिन पेट भरेगा, लेकिन आप उसे रोटी बनाने का तरीका सीखा देते हैं तो जिंदगी भर पेट भरेगा।
मित्रो, राजीव दीक्षित जी के परिचय में जितनी बातें कही जाएँ वो कम हैं। कुछ चंद शब्दों में उनके परिचय को बयान कर पाना असंभव है। ये बात वो लोग बहुत अच्छे से समझ सकते हैं जिन्होने राजीव दीक्षित जी को गहराई से सुना और समझा है।
राजीव दीक्षित जी का जन्म 30 नवम्बर 1967 को उत्तर प्रदेश राज्य के अलीगढ़ जनपद की अतरौली तहसील के नाह गाँव में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद के जे.के इंस्टीट्यूट से बी.टेक और IIT से एम.टेक की उपाधि प्राप्त की। उसके बाद CSIR में कार्य किया और भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के साथ भी Research Project में कार्य किया।
राजीव भाई एक वैज्ञानिक थे और ज्ञान के भण्डार थे जिस पर उन्होंने कभी घमंड नहीं किया। सिर्फ हकीकत को जानने की कोशिश किया और उसे सबको बताया।
जिसने राजीव दीक्षित के व्याख्यान नहीं सुने — उसकी शिक्षा अधूरी है। सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके व्याख्यानों को खुद सुनें और दूसरों को सुनायें।