Sanatan Dharma • सनातन परम्परा

ॐ

हिन्दू धर्म

सनातन — जिसका न आदि है, न अन्त

सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ॥

"सब सुखी हों, सब निरोग हों, सब कल्याण देखें, कोई दुःख न पाए।"

देवी-देवता और मंत्र देखें
4वेद
108उपनिषद
18पुराण
4पुरुषार्थ
33 कोटिदेव (प्रकार)

हिन्दू धर्म के मूल सिद्धांत

हिन्दू धर्म को "सनातन धर्म" भी कहते हैं। यह किसी एक ग्रंथ या एक संस्थापक पर नहीं, बल्कि वेद, उपनिषद, गीता और ऋषियों के अनुभव पर आधारित जीवन-पद्धति है। "एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति" — सत्य एक है, ज्ञानी उसे अनेक नामों से पुकारते हैं।

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ब्रह्म — एक परम सत्य

सम्पूर्ण सृष्टि के पीछे एक ही चेतना है। देवी-देवता उसी एक परमात्मा के अलग-अलग गुणों और शक्तियों के रूप हैं।

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आत्मा की अमरता

शरीर नश्वर है, आत्मा अजर-अमर है। गीता कहती है कि आत्मा को न शस्त्र काट सकते हैं, न अग्नि जला सकती है।

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कर्म का सिद्धांत

जैसा कर्म, वैसा फल। हमारे आज के कर्म ही हमारा भविष्य और अगला जन्म तय करते हैं।

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पुनर्जन्म

आत्मा कर्मों के अनुसार जन्म-मृत्यु के चक्र में घूमती है, जब तक उसे मोक्ष न मिल जाए।

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चार पुरुषार्थ

धर्म (कर्तव्य), अर्थ (साधन), काम (इच्छा-पूर्ति) और मोक्ष (मुक्ति) — मानव जीवन के चार लक्ष्य।

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चार योग-मार्ग

ज्ञान योग, भक्ति योग, कर्म योग और राज योग — ईश्वर तक पहुँचने के चार मार्ग, जो अलग-अलग स्वभाव के लोगों के लिए हैं।

त्रिमूर्ति — सृष्टि, पालन, संहार

परमात्मा की तीन प्रमुख शक्तियाँ तीन देवों के रूप में पूजित हैं।

ब्रह्मा

सृष्टिकर्ता

सृष्टि की रचना करते हैं। वेदों के ज्ञान के प्रतीक।

विष्णु

पालनकर्ता

सृष्टि का पालन करते हैं। धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं।

शिव

संहारकर्ता

अज्ञान और अहंकार का संहार कर नवसृजन का मार्ग खोलते हैं।

प्रमुख देवी-देवता और उनके मंत्र

प्रत्येक देवता का स्वरूप, उनकी शक्ति और उनका बीज या प्रमुख मंत्र। मंत्र का जप शुद्ध उच्चारण और श्रद्धा से करें; गुरु या विद्वान से सीखना उत्तम है।

मंत्र जप के नियम

मंत्र का प्रभाव उच्चारण, श्रद्धा और नियमितता से बढ़ता है।

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समय

ब्रह्ममुहूर्त या प्रातः और सायं का समय सर्वोत्तम माना गया है।

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आसन

स्वच्छ स्थान पर कुशा या ऊनी आसन पर सीधे बैठकर जप करें।

📿

माला

108 मनकों की माला से जप करें। नियमित संख्या तय कर लें।

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भाव

मन शान्त रखें और अर्थ का स्मरण करते हुए श्रद्धा से जप करें।