Gurukul Vidya Series • गुरुकुल विद्या
दिव्य ज्ञान का अनन्त सागर
वेद ही समस्त धर्म का मूल आधार है — मनुस्मृति
वेद — संस्कृत के विद् धातु से बना शब्द, जिसका अर्थ है "जानना"। वेद वह दिव्य ज्ञान है जो सृष्टि के आरम्भ में परमात्मा ने ऋषियों को प्रदान किया। ये ज्ञान न किसी मनुष्य की रचना है और न ही किसी एक काल की — यह अपौरुषेय (मनुष्य-रचित नहीं) और सनातन (शाश्वत) है।
वेद विश्व के सबसे प्राचीन ग्रन्थ हैं। इनमें ब्रह्माण्ड विज्ञान, गणित, भौतिकी, चिकित्सा, दर्शन, संगीत, कृषि, राजनीति और आध्यात्म — सभी विषयों का अद्भुत ज्ञान संचित है। गुरुकुल शिक्षा प्रणाली में वेद-अध्ययन सर्वोच्च प्राथमिकता थी।
इनकी भाषा वैदिक संस्कृत है — जो इतनी सटीक और वैज्ञानिक है कि नासा के वैज्ञानिकों ने इसे कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए सर्वाधिक उपयुक्त भाषा माना।
महर्षि वेदव्यास ने अनन्त वेद-ज्ञान को चार वेदों में संकलित किया — ऋग्, यजु, साम और अथर्व
ऋग्वेद विश्व का सर्वाधिक प्राचीन ग्रन्थ माना जाता है। इसमें अग्नि, इन्द्र, वरुण, मित्र, उषा आदि देवताओं की स्तुति में रचे गए मंत्र हैं। इसमें खगोल विज्ञान, वायु विज्ञान, भूगोल, समाज व्यवस्था और दार्शनिक रहस्यों का अद्भुत वर्णन है। प्रसिद्ध गायत्री मंत्र ऋग्वेद का ही है।
यजुर्वेद यज्ञ के क्रियात्मक पक्ष का वेद है। इसमें यज्ञ करते समय बोले जाने वाले मंत्र और उनकी विधियाँ हैं। यह कृष्ण यजुर्वेद और शुक्ल यजुर्वेद — दो भागों में है। इसमें अध्यात्म, भौतिक विज्ञान, रसायन और गृह-निर्माण का ज्ञान भी समाहित है। "नमः शिवाय" मंत्र इसी वेद में है।
सामवेद भारतीय संगीत का उद्गम स्थान है। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं — "वेदानां सामवेदोऽस्मि" (वेदों में मैं सामवेद हूँ)। इसकी अधिकांश ऋचाएँ ऋग्वेद से ली गई हैं किन्तु उन्हें राग-ताल में गाने की विधि अलग है। इसमें 7 स्वर, 22 श्रुतियाँ और संगीत के मूल सिद्धांत हैं।
अथर्ववेद सबसे विलक्षण वेद है। इसमें आयुर्वेद, गणित, खगोल, कृषि, वास्तु, राजनीति, मनोविज्ञान और समाजशास्त्र का ज्ञान है। यह वेद जीवन के सभी व्यावहारिक पक्षों से जुड़ा है। ऋषि अथर्वन और अंगिरस के नाम पर इसका नामकरण हुआ।
वेदों को सम्यक् समझने के लिए इन 6 शास्त्रों का अध्ययन अनिवार्य है। ये वेद के शरीर के अंग हैं।
वेद मंत्रों के शुद्ध उच्चारण का विज्ञान। स्वर, व्यंजन, मात्रा और उच्चारण-स्थान का अध्ययन। वेद का नासिका है शिक्षा।
यज्ञ, कर्मकाण्ड और धार्मिक अनुष्ठानों की पद्धति। श्रौत, गृह्य, धर्म और शुल्ब सूत्र इसके अन्तर्गत आते हैं। वेद के हाथ हैं कल्प।
पाणिनि की अष्टाध्यायी — विश्व की सर्वश्रेष्ठ व्याकरण। शब्द, धातु और वाक्य के नियमों का शास्त्र। वेद का मुख है व्याकरण।
वेद के कठिन शब्दों की व्याख्या। यास्काचार्य कृत निरुक्त वेदार्थ को समझने का साधन है। वेद का कान है निरुक्त।
यज्ञ के लिए उचित समय और तिथि का निर्धारण। ग्रह-नक्षत्र, ऋतु-ज्ञान और कालगणना का विज्ञान। वेद की आँखें हैं ज्योतिष।
वेद-मंत्रों की लय, ताल और छन्द की व्यवस्था। गायत्री, अनुष्टुभ, त्रिष्टुभ आदि छन्दों का ज्ञान। वेद के पाँव हैं छन्द।
चारों वेदों से निकले चार व्यावहारिक विज्ञान — जीवन के हर क्षेत्र में वेद का प्रयोग
युद्धकला, अस्त्र-शस्त्र विद्या, सैन्य व्यूहरचना और शारीरिक प्रशिक्षण का शास्त्र।
जीवन की विज्ञान — रोग-निदान, औषधि, शल्य चिकित्सा, आहार और स्वस्थ जीवनशैली।
संगीत शास्त्र — राग, ताल, स्वर, नृत्य और समस्त ललित कलाओं का विज्ञान।
वास्तु एवं शिल्पकला — भवन, मंदिर, नगर और यन्त्र निर्माण का प्राचीन विज्ञान।
प्रत्येक वेद की आंतरिक संरचना और उसके विभिन्न भागों का विवरण
ये मंत्र केवल शब्द नहीं — ये ब्रह्माण्ड की शक्तियों के कूट संकेत हैं
ये ऋषि वेदमंत्रों के रचयिता नहीं — द्रष्टा थे। इन्होंने तपस्या द्वारा इन मंत्रों को "देखा" था।
वेद केवल धार्मिक ग्रन्थ नहीं — ये जीवन के सभी क्षेत्रों का विश्वकोश हैं
परमाणु सिद्धांत (कणाद), गुरुत्वाकर्षण (ब्रह्मगुप्त), शून्य और दशमलव प्रणाली — सभी वेद-ज्ञान की देन हैं।
"पृथ्वी माता, आकाश पिता" — वेद प्रकृति-संरक्षण का प्रथम और महान संदेश देते हैं। यज्ञ से वायु-शुद्धि का विज्ञान।
वेद-मंत्रों का उच्चारण और ध्यान मस्तिष्क की तरंगों को संतुलित करता है। तनाव-मुक्ति का वैज्ञानिक आधार।
वेद-आधारित समाज में हज़ारों वर्षों तक न्याय, समता और सुख था। वर्तमान संकट का समाधान वेद में है।
UNESCO ने वेदों को विश्व की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया है। विश्व की प्राचीनतम जीवित ज्ञान-परंपरा।
आयुर्वेद, शल्य-चिकित्सा, मनोचिकित्सा और योगोपचार — सभी वेद-ज्ञान पर आधारित हैं। सुश्रुत ने 2600 वर्ष पूर्व शल्य-क्रिया की।
सृष्टि के आरम्भ से आज तक — वेद ज्ञान की अटूट धारा
जिज्ञासु मन के सामान्य प्रश्न और उनके उत्तर